गुटखा पर प्रतिबंध: यूपी में मांग, एमपी में विरोध
लखनऊ/भोपाल। लाखों लोगों की जिंदगियां तबाह करने वाले गुटखे पर प्रतिबंध लगाया जाये या नहीं। इस पर बहस छिड़ गई है। यह बहस उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छिड़ी है। यूपी में जहां लोग इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं, वहीं एमपी में प्रतिबंध हटाने की मांग। यहां प्रतिबंध लगाने के लिए लोग कोर्ट तक चले गये तो वहां गुटखे के समर्थन में लोग विरोध प्रदर्शन पर उतर आये।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में आज एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में पान मसाला और गुटखा के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है। ये मांग इंडियन डेंटल एसोसिएशन की उत्तर प्रदेश शाखा द्वारा की गयी है। दायर इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पान मसाला और गुटखा में तंबाकू तथा निकोटिन होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
इसलिए इन पर अतिशीघ्र प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश में गुटखे की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबन्ध की बात चल रही है वही दूसरी ओर मध्य प्रदेश में गुटखे पर प्रतिबंध पर जमकर विरोध हो रहा है।
उधर मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा तम्बाकुयुक्त गुटखे पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में दायर याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। जहाँ पान मसाला कम्पनी राजश्री गुटखा की ओर से उच्च न्यायालय के कार्यपालक न्यायाधीश सुशील हरकोली तथा आलोक अराधे की खंडपीठ में दायर याचिका में राज्य सरकार द्वारा तंबाखूयुक्त गुटखे पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2003 में केन्द्र सरकार द्वारा सिगरेट एवं तम्बाकुयुक्त उत्पादों के लिए बनाए गए कानून में गुटखा शामिल था, जबकि राज्य सरकार ने जिस 2006 खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत गुटखे पर प्रतिबंध लगाया है, वह इस कानून में आता ही नहीं है। अदालत मैं खाद्य-औषधि एवं स्वास्थ्य निरीक्षक संघ के अध्यक्ष हरदयाल दुबे ने एक आवेदन पेश कर इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शामिल किए जाने का अनुरोध किया।
उनका कहना था कि न्यायालय में इस संबंध में उनकी एक जनहित याचिका पूर्व से ही लंबित है। अदालत ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया। उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के लिए आगामी 15 मई की तिथि निर्धारित की है।








