कोर्ट ने एनजीओ को दुष्कर्मियों से मिलने की अनुमति नहीं दी, दोषी नहीं कर सकेंगे अंगदान – निर्भया केस

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नई दिल्ली. निर्भया केस के दोषियों को अंगदान का अवसर नहीं मिलेगा। दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को इस विषय में दाखिल की गई एनजीओ की याचिका खारिज कर दी गई।

एनजीओ ने दुष्कर्म के दोषियों से मिलने की अनुमति मांगी थी ताकि उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया जा सके। एडिशनल सेशन जज एसके अरोड़ा ने ऐसा कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। याचिका दोषियों को सजा सुनाए जाने से दो हफ्ते पहले दायर की गई थी।

जज एसके अरोड़ा ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता का दोषियों से किसी भी कारण से मिलने का आधार नहीं है, इसलिए जेल अधिकारियों को इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता।’’

यह याचिका रैको एनजीओ के संस्थापक सदस्य राहुल शर्मा ने दायर की थी। उसने कहा- वह समाज कल्याण के लिए दोषियों को अंगदान के लिए प्रेरित करना चाहता है। उसे दोषियों से मिलने दिया जाए।

सरकारी वकील इरफान अहमद ने याचिका पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा- दोषियों का डेथ वारंट जारी हो चुका है। ऐसे में उनसे परिवार का एक सदस्य और वकील के अलावा कोई नहीं मिल सकता।

दिल्ली की एक अदालत ने इसी सप्ताह निर्भया मामले के सभी चार दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया था। इन सभी को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी।

इन्हें 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक चलती बस में 22 साल की युवती से दुष्कर्म और हत्या का दोषी पाया गया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकी फांसी की सजा बरकरार रखी थी।